किशोर कुमार ने जब टेबल पर लेके गाया था यह सॉन्ग, आज भी सुपरहिट गाना है

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किशोर कुमार ने जब टेबल पर लेके गाया था यह सॉन्ग, आज भी सुपरहिट गाना है

किशोर कुमार के इस गाने को आज भी बेहद पसंद किया जाता है।

70-80 के दशक में जितने लोगों ने राष्ट्रीय मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ को पसंद किया था, उतने ही लोगों नें किशोर कुमार (किशोर कुमार) की आवाज़ को भी पसंद किया था। किशोर दा ने अपनी आवाज से लाखों दिलों को छूकर अपना बनाया था और आज भी किशोर कुमार की आवाज के लोग फैन हैं।

  • News18Hindi
  • आखरी अपडेट:13 अक्टूबर, 2020, 11:36 AM IST

मुंबई। बॉलीवुड में अपनी आवाज और एक्टिंग के दम पर अपनी पहचान बनाने वाले किशोर कुमार (किशोर कुमार) का निधन आज ही के दिन यानी 13 अक्टूबर 1987 को मुंबई में हुआ था। 70-80 के दशक में जितने लोगों ने राष्ट्रीय मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ को पसंद किया था, उतने ही लोगों नें किशोर दा की आवाज़ को भी पसंद किया था। किशोर दा ने अपनी आवाज से लाखों दिलों को छूकर अपना बनाया था और आज भी किशोर कुमार की आवाज के लोग फैन हैं।

आशा भोसले ने सुनाई कहानी
किशोर दा ने छंद अंदाज से गाए हैं और उनके सभी गाने बहुत ही हिट रहे हैं। किशोर कुमार और आशा भोसले ने फिल्मी दुनिया को कई सुपरहिट गाने दिए हैं। हाल ही में आशा भोसले (आशा भोसले) ने किशोर कुमार का गाना ‘इंतहा हो गया’ के पीछे का एक किस्सा अपने यूट्यूब चैनल पर ‘आशा की आशा’ में बताया था। आशा भोसले ने बताया कि वर्ष 1984 में प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘गीत’ का गाना ‘इंतहा हो गया इंतजार की ..’ को किशोर कुमार ने किस तरह से गाया था।

इसलिए टेबल पर लेट कर गाए गाने थेआशा ने बताया कि पहले तो किशोर दा ने इसे गाने से मना कर दिया था। फिर बाद में वह गाने के लिए तैयार हो गया। उन्होंने फैसला किया की इस गाने को वह सुनाने की तरह लेट कर गाएंगे। वह आसपास में मौजूद कर्मचारियों से टेबल की व्यवस्था करवाई और फिर उसी पर लेट कर इस गाने को रिकॉर्ड किया। बाद में यह गाना सुपरहिट साबित हुआ और आज भी इस गाने को बेहद पसंद किया जाता है।

बता दें, किशोर दा ने 1957 में बनी फिल्म ‘फंटूश’ में ‘दुखी मन मेरे’ गीत से अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा मानना ​​पड़ा। इसके बाद एसडी बर्मन ने किशोर कुमार को अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौका दिया। किशोर दा ने हिंदी के साथ ही तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फिल्मों के लिए भी गीत गाए। उन्हें आठ फिल्म फेयर अवार्ड मिले। उन्हें पहली फिल्म फेयर पुरस्कार 1969 में फिल्मोंम ‘अराधना’ के गीत ‘रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना’ के लिए दिया गया था।



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