आज से सिनेमा हॉल आपका इंतजार करेंगे, आप क्या तैयार हैं


(फोटो क्रेडिट: इंस्टाग्राम / @ kiaraaliaadvani)

बॉलीवुड से दिलजीत दोसांझ, मनोज बाजपेई और फातिमा सना शेख अभिनीत सूरज पर मंगल भारी और कियारा आडवाणी (किआरा आडवाणी) – आदित्य सील अभिनीत इंदु की जवानी के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म ट्यूसडे और फ्राइडे ही थिएटर में रूबरू होने को तैयार हैं। ।

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  • आखरी अपडेट:15 अक्टूबर, 2020, 12:45 पूर्वाह्न IST

मुंबई। सरकार ने -5 में देशभर के सिनेमाघरों को 15 अक्टूबर से खोलने का ऐलान कर दिया है लेकिन मार्च से रिलीज डेट शिफ्ट करते आ रहे बड़े बजट की फिल्मों के निर्माता अब भी निर्माता में उतरने से कतरा रहे हैं। उन्हें आशंका है कि पोस्ट कोरोना पीरियड में दर्शकों की दर्शकों की कमी उनकी फिल्मों को पीट सकती है, शायद यही कारण है कि सूर्यवंशी और 83 जैसी बड़े बैनर की फिल्में दिवाली पर नहीं आ रही हैं। वह भी तब जब सिनेमा हॉल खुलने के एक महीने दिवाली की रिलीज़ डेट है, जबकि छोटे बजट और उभरते चेहरों वाली हिंदी ही नहीं क्षेत्रीय सिनेमा की बड़ी फिल्में निर्माता में दम ठोकने जा रही हैं। बॉलीवुड से दिलजीत दोसांझ, मनोज बाजपेई और फातिमा सना शेख अभिनीत सूरज पर मंगल भारी और कियारा आडवाणी-आदित्य सील अभिनीत इंदु की जवानी के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म ट्यूसडे और फ्राइडे ही थिएटर में रूबरू होने को तैयार दिख रहे हैं।

संभावना है कि प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म बंटी और बबली -2 भी त्यौहारी सीजन में बॉक्स ऑफिस पर उतार सकते हैं। मगर लंबे समय से अटकीं सूर्यवंशी और 83 कब रिलीज होगी, इसको लेकर अब तक कोई कफर्म डेट नहीं है। सूर्यवंशी को लेकर निर्माता रिलायंस इंटरटेनमेंट के पास दो च्वाइस हैं। पहला एक्स और अगले साल गणतंत्र दिवस। निर्देशक रोहित शेट्टी सूर्यवंशी को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, इसलिए क्रिसमस पर 83 रिलीज डेट कंफर्म होती है सूर्यवंशी का 22 जनवरी तक खिसकना तय मान लें। वर्तमान में 4 दिसंबर को ब्रह्मास्त्र, 11 दिसंबर को मैदान और 25 दिसंबर को लाल सिंह चड्ढा रिलीज की कतार में शुरू कर रहे हैं।

ओटीटी पर दिवाली पर लक्ष्मी बम संग छलांग
अक्षय कुमार अभिनीत निर्देशक राघव लॉरेंस की फिल्म लक्ष्मी बम डिज़नी हल्स्टार पर दिवाली को वर्ल्ड वाइड रिलीज़ होगी जबकि छलिंग को अमेजॉन प्राइम दिवाली के दिन रिलीज़ कर रही है। वहाँ बड़ी फ़िल्मकार सिनेमाघरों में पहले छोटी फ़िल्मों के माध्यम से वेटर्स में फुटफाल के अनुमान से ही अपनी फ़िल्मों के किनारों परेंज किया जाता है। वे वर्तमान में छोटी फिल्मों के माध्यम से थिएटर के दर्शकों का न्यू नॉर्मल बिहेवियर चेक करना चाहते हैं।कायदे भी फायदे के बाबर न बन जाओ

सिनेमाघरों को लेकर केंद्र सरकार की गाइडलाइन भी जारी है और निर्माताओं की नींद उड़ा रखी है। शक है कि मध्य क्षमता से चलने वाले सिनेमाघर कम ऑकुपेंसी के बावजूद कितने दिन स्क्रीन दे पाएंगे। टिकटों के दाम भी बढ़ाए गए तो दर्शक ओटीटी के जरिए घरों मैं नई फिल्मों का मजा लेना ज्यादा पसंद करेंगे बजाए कोरोनावायरस के खतरे के बीच पेपर में आकर खुद को जोखिम में डालने का।





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